हल्द्वानी उत्तराखंड

“सत्यमेव विजयते” कार्यक्रम के विशेष संवाद के दौरान उप श्रम आयुक्त ने निर्माण श्रमिकों के कल्याणार्थ चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि श्रम विभाग द्वारा पंजीकृत श्रमिकों के आश्रितों को कन्या विवाह सहायता योजना के तहत आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत पात्र निर्माण श्रमिक की अधिकतम दो पुत्रियों के विवाह हेतु ₹51,000 की सहायता राशि निर्धारित की गई है, जो बोर्ड द्वारा कुछ शर्तों के अधीन स्वीकृत की जाती है।
उप श्रम आयुक्त ने यह भी अवगत कराया कि यदि किसी श्रमिक की कार्यस्थल पर दुर्घटनावश मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिजनों को ₹4,00,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है, जबकि सामान्य मृत्यु की स्थिति में यह राशि ₹2,00,000 निर्धारित है। इसके अतिरिक्त, श्रमिकों के बच्चों के लिए शिक्षा सहायता योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं, जिनके अंतर्गत उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को समुचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
श्रमिक की परिभाषा एवं पंजीकरण प्रक्रिया
कार्यक्रम के दौरान जब यह प्रश्न किया गया कि श्रमिक की परिभाषा क्या है, तब उप श्रम आयुक्त ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति जो सरकारी अथवा निजी निर्माण कार्यों में संलग्न है, जिसकी आयु 18 से 60 वर्ष के बीच हो तथा जिसने पूर्ववर्ती एक वर्ष में कम से कम 90 दिवस निर्माण कार्य किया हो, वह व्यक्ति निर्माण श्रमिक की श्रेणी में आता है और पंजीकरण हेतु पात्र होता है।
पंजीकरण हेतु इच्छुक श्रमिक श्रम विभाग के कार्यालय, सहायक श्रम आयुक्त, श्रम प्रवर्तन अधिकारियों, नगर निगम के उप नगर अधिकारी, सहायक अभियंता अथवा ग्राम विकास अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। साथ ही श्रम विभाग के किसी भी स्थानीय कार्यालय में जाकर भी पंजीकरण कराया जा सकता है।
राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त है लाभ प्रक्रिया
उप श्रम आयुक्त ने यह भी आश्वस्त किया कि इन सभी योजनाओं का लाभ बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के पात्र श्रमिकों को पारदर्शी रूप से प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने सभी श्रमिकों से आग्रह किया कि वे पंजीकरण कराकर श्रम विभाग की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लें एवं अपने जीवन स्तर को बेहतर बनाएं।



